गाजीपुर। जन्मजात बीमारियों और शारीरिक विकृतियों के साथ जन्म लेने वाले बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) उम्मीद की एक बड़ी किरण बनकर सामने आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की आरबीएसके टीम द्वारा ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है। इसी क्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहम्मदाबाद क्षेत्र के दो बच्चों का सफल उपचार कराया गया है।
आरबीएसके टीम ने जांच के दौरान रघुवरगंज निवासी एक वर्षीय अंशिका गुप्ता को क्लेफ्ट पैलेट यानी तालु में जन्मजात विकृति से पीड़ित पाया। टीम ने बच्ची को बेहतर उपचार के लिए हेरिटेज अस्पताल, वाराणसी रेफर किया, जहां उसका निःशुल्क ऑपरेशन कराया गया। ऑपरेशन के बाद अंशिका अब पूरी तरह स्वस्थ बताई जा रही है। परिवार के लिए यह इलाज किसी बड़ी राहत से कम नहीं है, क्योंकि समय पर उपचार मिलने से बच्ची को भविष्य में होने वाली परेशानियों से बचाने में मदद मिली है।

इसी तरह शेरपुर कलां निवासी नौ दिन के कार्तिक गुप्ता में जन्मजात क्लब फुट यानी पैर के टेढ़े होने की समस्या पाई गई। आरबीएसके टीम ने बच्चे को जिला अस्पताल गाजीपुर रेफर किया, जहां उसका सफलतापूर्वक उपचार किया गया। समय रहते उपचार मिलने से अब उसके पैर को सामान्य स्थिति में लाने की दिशा में काम किया गया है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहम्मदाबाद के अधीक्षक डॉ. आशीष राय ने बताया कि आरबीएसके योजना के तहत पूर्व में भी क्षेत्र के कई बच्चों की पहचान कर उनका ऑपरेशन और उपचार कराया जा चुका है। इस बार दो बच्चों का उपचार कर उन्हें भविष्य में होने वाली दिव्यांगता अथवा शारीरिक परेशानी से बचाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने बताया कि आरबीएसके टीम का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात बीमारियों की समय पर पहचान कर उन्हें उचित उपचार उपलब्ध कराना है।
इसी क्रम में उच्च केंद्र और जिला अस्पताल में उपचार के लिए भेजे गए बच्चों का फीडबैक भी लिया गया। सीएचसी मोहम्मदाबाद पर बच्चों के माता-पिता और परिवार के जिम्मेदार सदस्यों की मौजूदगी में उपचार के बाद उनकी स्थिति की जानकारी ली गई।
आरबीएसके टीम का कहना है कि ऐसे कई बच्चों का उपचार कराया जा चुका है और आगे भी क्षेत्र में बच्चों की स्क्रीनिंग कर जन्मजात बीमारियों की पहचान एवं समय पर उपचार का सिलसिला जारी रहेगा। समय पर मिला यह उपचार न सिर्फ बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बना रहा है, बल्कि उनके सामान्य भविष्य की उम्मीद को भी मजबूत कर रहा है।
इस पूरी प्रक्रिया में ब्लाक कार्यक्रम प्रबंधक संजीव कुमार एवं आरबीएसके टीम के चिकित्सक डॉ. राकेश वर्मा, डॉ. श्रेया त्रिपाठी और स्टाफ नर्स आशा सिंह की भूमिका रही।








