जमानियां (गाजीपुर)। स्थानीय क्षेत्र के बलुआ घाट पर होने वाले रामलीला मंचन को लेकर चल रहा विवाद और गहराता जा रहा है। यहां तक कि प्रशासनिक अधिकारी भी पर इस चर्चित विवाद पर असफल होते नजर आ रहे हैं।
जी हां, प्राचीन रामलीला समिति व रामलीला मंचन को लेकर दो पक्षों में चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए बुधवार को एडीएम वेद सिंह चौहान स्थानीय तहसील पहुंचे जहां एसडीएम निधि की उपस्थिति में बारी बारी से दोनों पक्षों से वार्ता की लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला।
डीएम की बैठक में कथित रूप से नवसृजित रामलीला समिति के अध्यक्ष अरविंद वर्मा व सदस्यों ने प्राचीन रामलीला समिति ट्रस्ट पर सवाल खड़ा कर आरोप लगाते हुए कहा कि चेयरमैन जयप्रकाश गुप्ता ने गलत तरीके से प्राचीन रामलीला समिति को ट्रस्ट में पंजीकृत कर दिया और खुद रामलीला समिति के मालिक बन बैठे, जो पूर्णतया गलत है। अरविंद वर्मा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि हम लोगों द्वारा रामलीला कराए जाने की पूरी तैयारी कराई जा चुकी है इसलिए हम लोग ही रामलीला का आयोजन कराएंगे।

उधर एडीएम ने दूसरे पक्ष से नगर पालिका चेयरमैन जयप्रकाश गुप्ता, जो काफी समय से रामलीला समिति के अध्यक्ष के रूप में रामलीला मंचन का आयोजन कराते चले आ रहे हैं, से उनकी बातों को सुना। चेयरमैन जयप्रकाश गुप्ता ने कहा कि काफी लंबे समय से प्राचीन रामलीला समिति के अध्यक्ष के रूप में हमारे द्वारा रामलीला का आयोजन कराया जा रहा है।
उन्होंने नए रामलीला समिति के गठन पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पुरानी समिति भंग किए बिना नई समिति का गठन किस आधार पर और किसके अनुमति से हुआ, जबकि धार्मिक आयोजनों की नई परंपरा की शुरुआत करने से पूर्व कानूनी रूप से शासन प्रशासन की अनुमति लेनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को प्राचीन रामलीला समिति ट्रस्ट पर कोई आपत्ति है तो वह इसके खिलाफ न्यायालय में जाए।
बहरहाल दोनों पक्षों से वार्ता के बाद एडीएम वेद सिंह चौहान किसी ठोस निर्णय पर पहुंचने में बेबस नजर आए। पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति के उद्देश्य से आए थे, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बनी। उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे जो भी निर्णय लिया जाएगा उसे बताया जाएगा।
वर्चस्व की लड़ाई बना रामलीला का आयोजन – एक तरफ प्राचीन रामलीला समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष जयप्रकाश गुप्ता तय समय पर बलुआ घाट पर रामलीला का मंचन कराने की पूरी तैयारी कर चुके हैं, तो वहीं दूसरी तरफ नवसृजित रामलीला समिति के लोग भी हर हाल में रामलीला का आयोजन कराने की ठान चुके हैं। दोनों पक्षों की तनातनी को नगरवासी वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देख रहे हैं।
वहीं कुछ राजनीतिक जानकारों की माने तो इस वर्चस्व की लड़ाई के पीछे भाजपा के दो गुटों का हाथ होना माना जा रहा है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि तहसील/जिला प्रशासन रामलीला का आयोजन कराने की किसे अनुमति देती है क्योंकि अब रामलीला के आयोजन में वक्त बहुत कम है और दोनों पक्षों व उनके समर्थकों में तनातनी अपने चरम पर है।
आज की बैठक में प्रशासन द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिये जाने पर अब लोग सवाल यह भी कर रहें हैं कि दशहरा पर्व पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्या प्रशासन द्वारा दोनों पक्षों को अनुमति देने के बजाय कमान खुद अपने हाथों में लेकर रामलीला कराया जाएगा?








