जमानियां (गाज़ीपुर)। गंगा नदी के बढ़े हुए जलस्तर में घटाव शुरू होने के बाद स्थानीय क्षेत्र के तटवर्ती गांवों में अब कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो गई है। कई गांवों की बस्तियों में अब भी बाढ़ का पानी लगा हुआ है, जबकि संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी भर जाने से ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित है। खेतों में खड़ी सैकड़ों एकड़ फसलें जलमग्न होने से किसानों के सामने भारी नुकसान का संकट खड़ा हो गया है।
इसी बीच जिला पंचायत सदस्य बसन्त यादव ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित कालनपुर, ताजपुर मांझा, राघोपुर, चितावनपट्टी, मंझरिया और मतसा समेत कई गांवों का दौरा कर वर्तमान हालातों का जायजा लिया। उन्होंने बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों और किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। बाढ़ प्रभावित गांवों की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे बसन्त यादव को ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ के कारण दैनिक जरूरतों की वस्तुओं के साथ-साथ पीने के पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की समस्या बनी हुई है।
बाढ़ का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ा है। खेतों में लगी सैकड़ों एकड़ फसलें पानी में डूबकर नष्ट होने की स्थिति में हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है। वहीं, पशुपालकों के सामने पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों ने जिला पंचायत सदस्य को अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाओं और पशुओं के लिए चारे की तत्काल व्यवस्था कराने की मांग की। जिसपर बसन्त यादव ने मौके से ही तहसील और जिला प्रशासन के अधिकारियों से फोन पर वार्ता की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित गांवों में तत्काल राहत सामग्री, तिरपाल, सुरक्षित पेयजल, पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और आवश्यक दवाओं का वितरण कराने की मांग की।
उन्होंने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में नावों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की, ताकि आपात स्थिति में ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके। साथ ही उन्होंने बाढ़ का पानी उतरने के बाद फसलों को हुए नुकसान का शीघ्र सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग प्रशासन से की। बसन्त यादव ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में वह क्षेत्र की जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।








