स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने तैयार किए 25 हजार से अधिक स्कूली ड्रेस, आय बढ़ाने की नेक पहल

गाजीपुर। जिले में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रशासन की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं को विद्यालयों की विभिन्न जरूरतों से जोड़ने की पहल की जा रही है।

मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद ने मीडिया से बातचीत में बताया कि जनपद में करीब 2266 विद्यालय संचालित हैं, जहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शासन की ओर से बच्चों की ड्रेस, जूते-मोजे समेत अन्य आवश्यक सामग्री के लिए 12 सौ रुपये की धनराशि अभिभावकों के खातों में भेजी जाती है। प्रशासन का प्रयास है कि बच्चों के ड्रेस की सिलाई का काम स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से कराया जाए, ताकि उन्हें गांव और आसपास के क्षेत्र में ही रोजगार मिल सके।

सीडीओ ने बताया कि पिछले करीब एक महीने में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 25 हजार से अधिक स्कूल ड्रेस तैयार कराई जा चुकी हैं। ड्रेस तैयार करने के एवज में उपलब्ध धनराशि से एसएचजी की महिलाओं को भुगतान किया जा रहा है। इससे जहां बच्चों को समय से गुणवत्तापूर्ण ड्रेस उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है, वहीं महिलाओं के लिए आय का स्थायी जरिया विकसित करने का प्रयास भी किया जा रहा है।

स्कूलों की स्वच्छता व्यवस्था से भी जुड़ेंगे समूह

विद्यालयों को मिलने वाली कंपोजिट ग्रांट का उपयोग छात्र संख्या के आधार पर विभिन्न आवश्यक कार्यों में किया जाता है। इसमें विद्यालयों की साफ-सफाई और स्वच्छता व्यवस्था भी शामिल है। स्कूलों में फिनायल, वाशिंग पाउडर समेत अन्य सफाई सामग्री की आवश्यकता होती है।

सीडीओ के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे फिनायल और अन्य स्वच्छता उत्पादों को विद्यालयों तक पहुंचाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे स्कूलों की स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होने के साथ ही इन उत्पादों के निर्माण से जुड़ी महिलाओं की आमदनी भी बढ़ाई जा सकेगी।

मिड-डे मील की सामग्री खरीद में भी समूहों को प्राथमिकता –

विद्यालयों में संचालित मिड-डे मील योजना में कन्वर्जन कॉस्ट के माध्यम से सब्जियां, मसाले और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदी जाती है। प्रशासन का प्रयास है कि जहां संभव हो, इन सामग्रियों की खरीद स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से की जाए। इससे स्थानीय स्तर पर महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के साथ बच्चों को पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।

बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश नहीं –

मुख्य विकास अधिकारी ने विद्यालयों की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर भी स्पष्ट निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को बिना अनुमति विद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को विद्यालय में किसी कार्य से जाना है तो उसे बीएसए अथवा संबंधित एबीएसए से अनुमति लेकर ही विद्यालय परिसर में प्रवेश करना होगा।

प्रशासन की इस पहल से जिले में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। स्कूल ड्रेस, स्वच्छता सामग्री और मिड-डे मील की आवश्यक वस्तुओं को स्थानीय समूहों से जोड़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है।


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