✍️ प्रदीप शर्मा
जमानियां (गाजीपुर)। स्थानीय क्षेत्र के असैचंदपुर गांव स्थित श्री चतुर्वेद शांडिल्य विद्याश्रम में 10 बटुकों का उपनयन संस्कार (यज्ञोपवीत संस्कार) वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। जिसके बाद उन्हें मंत्र दीक्षा दी गई।
आज के दौर में लोगों के मन मस्तिष्क पर जिस प्रकार से पाश्चात्य संस्कृति ने अपनी गहरी पैठ बनानी शुरू कर दी है, ऐसे में भारतीय संस्कृति और परंपरा को बनाए रखना आज के दौर में काफी प्रासंगिक है और यह तभी संभव है जब हम तकनीकी और विज्ञान के साथ वेद शास्त्रों का अनुसरण करेंगे।
कुछ ऐसी ही विचारधारा के साथ असैचंदपुर गांव में महर्षि शांडिल्य ट्रस्ट के संरक्षण में श्री चतुर्वेद शांडिल्य विद्याश्रम की स्थापना कर बालकों को वेद शास्त्र की निःशुल्क शिक्षा देने के लिए अलख जगाने का शुभारंभ किया गया है। बीते गुरुवार 29 मई को आचार्य हरिओम तिवारी द्वारा विधि विधान तथा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विद्याश्रम (गुरुकुल) में प्रवेश लेने वाले 10 बटुकों का उपनयन संस्कार किया। इसके बाद उन्हें गायत्री मंत्र की दीक्षा दी गई और गुरुकुल में रहने के नियमों का ज्ञान दिया गया।
महर्षि शांडिल्य ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद तिवारी ने बताया कि वेद शास्त्र के अध्ययन में रुचि लेने वाले 10 वर्ष की आयु के बालकों का आवासीय विद्याश्रम में प्रवेश और शिक्षा दीक्षा पूर्ण रूप से निःशुल्क है। इस विद्याश्रम में योग्य आचार्यों द्वारा 7 वर्षों तक वेद शास्त्रों की शिक्षा दी जाएगी। जिसमें बटुकों के रहने, खाने और अध्ययन की निःशुल्क व्यवस्था है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में गांव के इस गुरुकुल से शिक्षित वेदाचार्य निकलेंगे, जो भारतीय संस्कृति और परंपरा को बनाए रखने में अपनी महती भूमिका निभाएंगे।
उक्त अवसर पर ट्रस्ट की उपाध्यक्ष सीमा तिवारी, चन्दन चौबे, शिवम साह, आदित्या ओझा, आलोक मिश्र, कार्तिक तिवारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।










