जमानियां (गाजीपुर)। जब कानून को ताक पर रख कर सड़क पर सत्ता का ख्वाब देखा जाए और आम जनता की परेशानियों को ठोकर मार दी जाए – तो समझ लीजिए कि अराजकता हावी होने लगी है।
आएदिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जाता है कि मनबढ़ और शातिर किस्म के लोगों द्वारा भौकाल बनाने के लिए नियमों को ताक पर रख कर चट्टी – चौराहों, चलती वाहनों के ऊपर या अस्त्र शस्त्र से केक काट कर अपना जन्मदिन मनाया जाता है। ऐसे लोगों को ना ही आम लोगों की परवाह होता है और ना ही प्रशानिक कार्रवाई का डर होता है।
कुछ ऐसा ही मामला रविवार की रात करीब 8:40 बजे स्थानीय क्षेत्र के स्टेशन बाजार के गांधी चौक में देखने को मिला, जहां एक छुटभैये नेता ने बीच सड़क को ही पार्टी प्लॉट बना दिया और अपने दर्जन भर समर्थकों के साथ बीच सड़क पर सरेआम तेज ध्वनि के साथ गाना बजाकर बाकायदा टेबल पर केक काट कर अपना जन्मदिन ऐसे मनाया, मानो ये सड़क उसका कोई प्राइवेट फार्महाउस हो! इस दौरान न तो ट्रैफिक की परवाह की गई, न राहगीरों की परेशानी का ख्याल रखा गया।

हद तो तब हो गई जब छुटभैये नेता के इस कृत्य से राहगीरों के आवागमन में परेशानी, साथ ही यातायात व्यवस्था भी कुछ देर के लिए बाधित हो गई। ऐसे में राहगीर और वाहन चालक बेबस हो कर तमाशा देखते रह गए और छुटभैये नेता समर्थकों के साथ ठहाके लगाते नजर आया।
छुटभैये नेता का यह कृत्य देख कर राहगीरों में नाराजगी साफ झलक रही थी, तो वहीं राहगीरों की परेशानियों को अनदेखा कर वह और उसके समर्थक जन्मदिन की खुशियां मनाने, वीडियो फोटो शूट करने में मदमस्त नज़र आए। लोगों की माने तो सार्वजनिक स्थलों को निजी कार्यक्रमों का मंच बनाना अब फैशन बनता जा रहा है। अगर सरेआम सड़कें जश्न की जगह बनती रहीं और प्रशासन आंखें मूंदे बैठा रहा, तो आने वाले समय में आम जनता की सुरक्षा और सुविधा दोनों खतरे में पड़ जाएंगी।
वैसे छुटभैये नेता के इस कृत्य से उसकी वाहवाही के बजाय उसके समर्थकों को छोड़कर स्थानीय बाजार के लोगों के बीच उसकी खूब किरकिरी हो रही है।
ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि, क्या अब नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए जन्मदिन, अंतिम संस्कार या शादी विवाह या मैरेज एनिवर्सरी का जश्न अब चट्टी चौराहों पर मनाया जायेगा ?
शासन प्रशासन द्वारा ऐसे विषयों का संज्ञान लेकर संबंधित लोगों पर सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए ताकि आने वाले दिनों में दोबारा कोई सड़क पर सत्ता की ड्रामा का रिहर्सल न कर सके। साथ ही इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना न पड़ेगा और लॉ एंड आर्डर (कानून व्यवस्था) की धज्जियां न उड़े।










